From research paper "Applied Geometry of the Sulba Sutras" by John F. Price The Sulba Sutras, part of the Vedic literature of India,describe many geometrical properties and constructions such as the classical relationship a 2 +b 2 =c 2 between the sides of a right-angle triangle and arithmetical formulas such as calculating the square root of two accurate to five decimal places. Although this article presents some of these constructions,its main purpose is to show how to consider each of the main Sulba SDtras as a finely crafted, integrated manual for the construction of citis or ceremonial platforms. Certain key words, however, suggest that the applications go far beyond this. Paper "Square Roots in the Sulbasutra" by David W. Henderson can be read here . Following are some more relevant links :- http://en.wikipedia.org/wiki/Shulba_Sutras http://www.krishnamurthys.com/kvforp/VK1/History_Maths_Indian_contribution....
South Asian History is a non-commercial project that brings the most vital aspects of the sub-continent's history to web users. Their selections illuminate aspects of South Asian History that aren't always very well known, but of crucial importance to the region's future. http://india_resource.tripod.com/sahistory.html
12 ज्योतिर्लिंगों का महत्व व महिमा *************************************** भगवान शिव की भक्ति का महीना सावन शुरू हो चुका है। शिवमहापुराण के अनुसार एकमात्र भगवान शिव ही ऐसे देवता हैं, जो निष्कल व सकल दोनों है...
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का भारत के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान आरएसएस का देश की आजादी की लड़ाई में योगदान को लेकर अक्सर प्रश्न उठाये जाते हैं | जब शौध और अध्ययन हुआ तो पता चला आरएसएस के संस्थापक डॉक्टर हेडगेवार का देश की आजादी के लिए योगदान गांधी नेहरू सहित कई बड़े नेताओं से अधिक त्यागम था | डॉ हेडगेवार जी ने 16 वर्ष की आयु में युवाओं में राष्ट्रीय घटनाओं पर चर्चा और क्रांतिकारी गुणों के विकास के लिए 1901 में चर्चा मण्डल “देशबंधु समाज “की शुरुआत की । पढ़ें- (आर्म्ड स्ट्रगल फ़ॉर फ्रीडम , पृष्ठ 372 -बी एस हरदास ) डॉ हेडगेवार ने इस संगठन में शामिल होने के लिए जो प्रतिज्ञा रखी थी करितो संमित्र हो निश्च्च्ये अपर्णी देहास देश कारयी अर्थात अपना शरीर और आत्मा मातृभूमि की सेवा में अर्पित करता हूँ । पढ़ें (आर्म्ड स्ट्रगल फ़ॉर फ्रीडम , पृष्ठ 374 -बी एस हरदास ) डॉ हेडगेवार जी को स्कूल में अंग्रेज अफसर के निरीक्षण के समय “वन्देमातरम”के नारे लगवाने , नागपुर के मॉरिस कालेज सहित 2000 छात्रों की हड़ताल कराने और भरी सभा मे अंग्रेजो से माफी मांगने से इनकार करने पर सर रेजि...
3 दिसम्बर/पुण्य-तिथि बौद्धिक योद्धा सीताराम गोयल विदेशी और हिंसा पर आधारित वामपंथी विचारधारा को बौद्धिक धरातल पर चुनौती देने वालों में श्री सीताराम गोयल का नाम प्रमुख है। यद्यपि पहले वे स्वयं कम्यूनिस्ट ही थे; पर उसकी असलियत समझने के बाद उन्होंने उसके विरुद्ध झंडा उठा लिया। इसके साथ ही वे अपनी लेखनी से इस्लाम और ईसाई मिशनरियों के देशघातक षड्यन्त्रों के विरुद्ध भी देश को जाग्रत करते रहे। 16 अक्टूबर, 1921 में जन्मे श्री सीताराम जी मूलतः हरियाणा के निवासी थे। उनकी जीवन-यात्रा नास्तिकता, आर्य समाजी, गांधीवादी और वामंपथी से प्रखर और प्रबुद्ध हिन्दू तक पहुंची। इसमें रामस्वरूप जी की मित्रता ने निर्णायक भूमिका निभाई। इस बारे में उन्होंने एक पुस्तक ‘मैं हिन्दू क्यों बना ?’ भी लिखी। वामपंथ के खोखलेपन को उजागर करने के लिए सीताराम जी ने उसके गढ़ कोलकाता में ‘सोसायटी फाॅर दि डिफेन्स आॅफ फ्रीडम इन एशिया’ नामक मंच तथा ‘प्राची प्रकाशन’ की स्थापना की। 1954 में कोलकाता के पुस्...
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