Friday, July 11, 2014

History behind Guru Poornima

**महर्षि वेदव्यास : भगवान के अवतार
गुरुपूर्णिमा पर होता है महर्षि वेदव्यास का पूजन

महर्षि वेदव्यास जी भगवान के अवतार हैं, वे अमर हैं। महर्षि व्यास का पूरा नाम कृष्णद्वैपायन है। उन्होंने वेदों का विभाग किया, इसलिए उनको व्यास या वेदव्यास कहा जाता है। उनके पिता महर्षि पराशर तथा माता सत्यवती है। भारत भर में गुरुपूर्णिमा के दिन गुरुदेव की पूजा के साथ महर्षि व्यास की पूजा भी की जाती है।

द्वापर युग के अंतिम भाग में व्यासजी प्रकट हुए थे। उन्होंने अपनी सर्वज्ञ दृष्टि से समझ लिया कि कलियुग में मनुष्यों की शारीरिक शक्ति और बुद्धि शक्ति बहुत घट जाएगी। इसलिए कलियुग के मनुष्यों को सभी वेदों का अध्ययन करना और उनको समझ लेना संभव नहीं रहेगा।

व्यासजी ने यह जानकर वेदों के चार विभाग कर दिए। जो लोग वेदों को पढ़, समझ नहीं सकते, उनके लिए महाभारत की रचना की। महाभारत में वेदों का सभी ज्ञान आ गया है। धर्मशास्त्र, नीतिशास्त्र, उपासना और ज्ञान-विज्ञान की सभी बातें महाभारत में बड़े सरल ढंग से समझाई गई हैं।

इसके अतिरिक्त पुराणों की अधिकांश कथाओं द्वारा हमारे देश, समाज तथा धर्म का पूरा इतिहास महाभारत में आया है। महाभारत की कथाएं बड़ी रोचक और उपदेशप्रद हैं।

सब प्रकार की रुचि रखने वाले लोग भगवान की उपासना में लगें और इस प्रकार सभी मनुष्यों का कल्याण हो। इसी भाव से व्यासजी ने अठारह पुराणों की रचना की।

इन पुराणों में भगवान के सुंदर चरित्र व्यक्त किए गए हैं। भगवान के भक्त, धर्मात्मा लोगों की कथाएं पुराणों में सम्मिलित हैं। इसके साथ-साथ व्रत-उपवास को की विधि, तीर्थों का माहात्म्य आदि लाभदायक उपदेशों से पुराण परिपूर्ण है।

वेदांत दर्शन के रचना करने वाले महर्षि वेदव्यास ने वेदांत दर्शन को छोटे-छोटे सूत्रों में लिखा गया है, लेकिन गंभीर सूत्रों के कारण ही उनका अर्थ समझने के लिए बड़े-बड़े ग्रंथ लिखे हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार ही गुरुपूर्णिमा पर गुरुदेव की पूजा के साथ ही महर्षि व्यास की पूजा भी की जाती है। हिन्दू धर्म के सभी भागों को व्यासजी ने पुराणों में भली-भांति समझाया है। महर्षि व्यास सभी हिन्दुओं के परम पुरुष हैं। पुण्यात्मा भक्तों को उनके दर्शन भी हुए हैं।

Thursday, July 10, 2014

**परम गुरु--हिन्दू धर्म की गंगा: स्वामी रामकृष्ण परमहंस

**परम गुरु--हिन्दू धर्म की  गंगा
स्वामी रामकृष्ण परमहंस

गदाधर से सनातन परंपरा की साक्षात प्रतिमूर्ति रामकृष्ण परमहंस बनने तक की साधना पूरी करके दुनिया को चमत्कृत कर देने वाले ऐसे महात्मा रामकृष्ण परमहंस के जीवन-चरित से प्रेरणा लेकर अपना जीवन आलोकित करने की दिशा में प्रशस्त हों....।

रामकृष्ण बहुत-कुछ अनपढ़ मनुष्य थे, स्कूल के उन्होंने कभी दर्शन तक नहीं किए थे। वे न तो अंग्रेजी जानते थे, न वे संस्कृत के ही जानकार थे, न वे सभाओं में भाषण देते थे, न अखबारों में वक्तव्य। उनकी सारी पूंजी उनकी सरलता और उनका सारा धन महाकाली का नाम-स्मरण मात्र था।

दक्षिणेश्वर की कुटी में एक चौकी पर बैठे-बैठे वे उस धर्म का आख्यान करते थे, जिसका आदि छोर अतीत की गहराइयों में डूबा हुआ है और जिसका अंतिम छोर भविष्य के गहवर की ओर फैल रहा है। निःसंदेह रामकृष्ण प्रकृति के प्यारे पुत्र थे और प्रकृति उनके द्वारा यह सिद्ध करना चाहती थी कि जो मानव-शरीर भोगों का साधन बन जाता है, वही चाहे तो त्याग का भी पावन यंत्र बन सकता है।

द्रव्य का त्याग उन्होंने अभ्यास से सीखा था, किन्तु अभ्यास के क्रम में उन्हें द्वंदों का सामना करना नहीं पड़ा। हृदय के अत्यंत निश्छल और निर्मल रहने के कारण वे पुण्य की ओर संकल्प-मात्र से ब़ढ़ते चले गए। काम का त्याग भी उन्हें सहज ही प्राप्त हो गया। इस दिशा में संयमशील साधिका उनकी धर्मपत्नी माता शारदा देवी का योगदान इतिहास में सदा अमर रहेगा।
घर बैठे उन्हें गुरु मिलते गए। अद्वैत साधना की दीक्षा उन्होंने महात्मा तोतापुरी से ली, जो स्वयं उनकी कुटी में आ गए थे। तंत्र-साधना उन्होंने एक भैरवी से पाई जो स्वयं घूमते-फिरते दक्षिणेश्वर तक आ पहुंची थीं। उसी प्रकार इस्लामी साधना के उनके गुरु गोविन्द राय थे जो हिन्दू से मुसलमान हो गए थे। और ईसाइयत की साधना उन्होंने शंभुचरण मल्लिक के साथ की थी जो ईसाई धर्म के ग्रंथों के अच्छे जानकार थे।

सभी साधनाओं में रमकर धर्म के गूढ़ रहस्यों की छानबीन करते हुए भी काली के चरणों में उनका विश्वास अचल रहा। जैसे अबोध बालक स्वयं अपनी चिंता नहीं करता, उसी प्रकार रामकृष्ण अपनी कोई फिक्र नहीं करते थे। जैसे बालक प्रत्येक वस्तु की याचना अपनी मां से करता है, वैसे ही रामकृष्ण भी हर चीज काली से मांगते थे और हर काम उनकी आज्ञा से करते थे। कह सकते हैं कि रामकृष्ण के रूप में भारत की सनातन परंपरा ही देह धरकर खड़ी हो गई थी।

दरसअल, उन्होंने साधनापूर्वक धर्म की जो अनुभूतियां प्राप्त की थीं, कालांतर में स्वामी विवेकानंद ने उनसे व्यावहारिक सिद्धांत निकाले। रामकृष्ण अनुभूति थे, विवेकानंद उनकी व्याख्या बनकर आए। रामकृष्ण दर्शन थे, विवेकानंद ने उनके क्रियापक्ष का आख्यान किया। रामकृष्ण और विवेकानंद एक ही जीवन के दो अंश, एक ही सत्य के दो पक्ष थे।

स्वामी निर्वेदानंद ने रामकृष्ण परमहंस को हिन्दू धर्म की गंगा कहा है, जो वैयक्तिक समाधि के कमंडलु में बंद थी। स्वामी विवेकानंद इस गंगा के भागीरथी हुए और उन्होंने देवसरिता को रामकृष्ण के कमंडलु से निकालकर सारे विश्व में फैला दिया। वस्तुतः हिन्दू धर्म में जो गहराई और माधुर्य है, रामकृष्ण परमहंस उसकी प्रतिमा थे। उनकी इन्द्रियां पूर्ण रूप से उनके वश में थीं।

रक्त और मांस के तकाजों का उन पर कोई असर न था। सिर से पांव तक वे आत्मा की ज्योति से परिपूर्ण थे। आनंद, पवित्रता और पुण्य की प्रभा उन्हें घेरे रहती थी। वे दिन-रात परमार्थ- चिन्तन में निरत रहते थे। सांसारिक सुख-समृद्धि, यहां तक कि सुयश का भी उनके सामने कोई मूल्य नहीं था।

रामकृष्ण परमहंस के वचनामृत की धारा जब फूट पड़ती थी, तब बड़े-से- बड़े तार्किक अपने- आपमें खोकर मूक हो जाते थे। उनकी विषय प्रतिपादन की शैली ठीक वही थी जिसका आश्रय भारत के प्राचीन ऋषियों पार्श्वनाथ, बुद्ध और महावीर ने लिया था, और जो परंपरा से भारतीय संतों के उपदेश की पद्धति रही है।

वे तर्कों का सहारा कम लेते थे, जो कुछ समझाना होता उसे उपमाओं और दृष्टांतों से समझाते थे। संत सुनी-सुनाई बातों का आख्यान नहीं करते, वे तो आंखों-देखी बात कहते हैं, अपनी अनुभूतियों का निचोड़ दूसरों के हृदय में उतारते हैं। ऐसे सनातन परंपरा की साक्षात प्रतिमूर्ति कहे जाने वाले महात्मा रामकृष्ण परमहंस की जयंती पर उन्हें नमन।

ऐसे गुरु को गुरु पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर नमन ।

Wednesday, July 2, 2014

विरक्त सन्त : स्वामी रामसुखदास जी

3 जुलाई/पुण्य-तिथि

विरक्त सन्त    : स्वामी रामसुखदास जी

धर्मप्राण भारत में एक से बढ़कर एक विरक्त सन्त एवं महात्माओं ने जन्म लिया है। ऐसे ही सन्तों में शिरोमणि थे परम वीतरागी स्वामी रामसुखदेव जी महाराज। स्वामी जी के जन्म आदि की ठीक तिथि एवं स्थान का प्रायः पता नहीं लगता; क्योंकि इस बारे में उन्होंने पूछने पर भी कभी चर्चा नहीं की। फिर भी जिला बीकानेर (राजस्थान) के किसी गाँव में उनका जन्म 1902 ई. में हुआ था, ऐसा कहा जाता है।

उनका बचपन का नाम क्या था, यह भी लोगों को नहीं पता; पर इतना सत्य है कि बाल्यवस्था से ही साधु सन्तों के साथ बैठने में उन्हें बहुत सुख मिलता था। जिस अवस्था में अन्य बच्चे खेलकूद और खाने-पीने में लगे रहते थे, उस समय वे एकान्त में बैठकर साधना करना पसन्द करते थे। बीकानेर में ही उनका सम्पर्क श्री गम्भीरचन्द दुजारी से हुआ। दुजारी जी भाई हनुमानप्रसाद पोद्दार एवं सेठ जयदयाल गोयन्दका के आध्यात्मिक विचारों से बहुत प्रभावित थे। इस प्रकार रामसुखदास जी भी इन महानुभावों के सम्पर्क में आ गये।

जब इन महानुभावों ने गोरखपुर में ‘गीता प्रेस’ की स्थापना की, तो रामसुखदास जी भी उनके साथ इस काम में लग गये। धर्म एवं संस्कृति प्रधान पत्रिका ‘कल्याण’ का उन्होंने काफी समय तक सम्पादन भी किया। उनके इस प्रयास से ‘कल्याण’ ने विश्व भर के धर्मप्रेमियों में अपना स्थान बना लिया। इस दौरान स्वामी रामसुखदास जी ने अनेक आध्यात्मिक ग्रन्थों की रचना भी की। धीरे-धीरे पूरे भारत में उनका एक विशिष्ट स्थान बन गया।

आगे चलकर भक्तों के आग्रह पर स्वामी जी ने पूरे देश का भ्रमणकर गीता पर प्रवचन देने प्रारम्भ किये। वे अपने प्रवचनों में कहते थे कि भारत की पहचान गाय, गंगा, गीता, गोपाल तथा गायत्री से है। स्वाधीनता प्राप्ति के बाद जब-जब शासन ने हिन्दू कोड बिल और धर्मनिरपेक्षता की आड़ में हिन्दू धर्म तथा संस्कृति पर चोट करने का प्रयास किया, तो रामसुखदास जी ने डटकर शासन की उस दुर्नीति का विरोध किया।

स्वामी जी की कथनी तथा करनी में कोई भेद नहीं था। सन्त जीवन स्वीकार करने के बाद उन्होंने जीवन भर पैसे तथा स्त्री को स्पर्श नहीं किया। यहाँ तक कि अपना फोटो भी उन्होंने कभी नहीं खिंचने दिया। उनके दूरदर्शन पर आने वाले प्रवचनों में भी केवल उनका स्वर सुनाई देता था; पर चित्र कभी दिखायी नहीं दिया।

स्वामी जी ने अपनी कथाओं में कभी पैसे नहीं चढ़ने दिये। उनका कोई बैंक खाता भी नहीं था। उन्होंने अपने लिए आश्रम तो दूर, एक कमरा तक नहीं बनाया। उन्होंने किसी पुरुष या महिला को अपना शिष्य भी नहीं बनाया। यदि कोई उनसे शिष्य बना लेने की प्रार्थना करता था, तो वे ‘कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम’ कहकर उसे टाल देते थे।

तीन जुलाई, 2005 (आषाढ़ कृष्ण 11) को ऋषिकेश में 103 वर्ष की आयु में उन्होंने अपना शरीर छोड़ा। उनकी इच्छानुसार देहावसान के बाद गंगा के तट पर दो चिताएँ बनायी गयीं। एक में उनके शरीर का तथा दूसरी पर उनके वस्त्र, माला, पूजा सामग्री आदि का दाह संस्कार हुआ। इस प्रकार परम वीतरागी सन्त रामुसखदास जी ने देहान्त के बाद भी अपना कोई चिन्ह शेष नहीं छोड़ा, जिससे कोई उनका स्मारक न बना सके।

चिताओं की अग्नि शान्त होने पर अचानक गंगा की एक विशाल लहर आयी और वह समस्त अवशेषों को अपने साथ बहाकर ले गयी। इस प्रकार माँ गंगा ने अपने प्रेमी पुत्र को बाहों में समेट लिया।

Tuesday, November 19, 2013

Tradition of Hindu Saints, Seers and Sages from India.

Watch this excellent talk given by Prof. Kapil Kapoor on subject "De-subjugating Timeless Vocabularies – Swami Vivekananda as Intellectual Catalyst". He delivered this keynote talk at "International Conference on Swami Vivekananda" held at University of Southern California School of Religion

From Wikipedia, his bio is
Dr. Kapil Kapoor, (born November 17, 1940) is an Indian scholar of linguistics and literature and an authority on Indian intellectual traditions.[1] He is former Pro-Vice Chancellor of Jawaharlal Nehru University (JNU) and served as professor at Centre for Linguistics and English, and Concurrent Professor at Centre for Sanskrit Studies there before retiring in 2005.[2][3] He is Editor-in-Chief of the 11-Volume Encyclopedia of Hinduism published by Rupa & Co. in 2012.[4]
Highlights of the talk:

  • Did Swami Vivekananda came from vacuum ?  Bharat has time immemorial history of great Saints, Sages and Seer with impeccable geniusness.  Swami Vivekananda belong to the same tradition.
  • India faced hundreds of years of oppression from invaders. Few know about Hindu swami's contribution and their works to keep the Sanatan Dharma alive.
  • Before Britishers destroyed India's education system India had schools in each village. Only 12% of the teachers were Brahmins and literacy rate was high as all used to go to school.
  • Due to abduction of mature girls by Muslims in Bengal, to safeguard their daughter parents used to marry their daughters in younger age. This led to many young widows in the society at that time.
  • Raja Ram Mohan Roy and Keshav Chandra Sen could give only calibrated response to western challenges to the Sanatan Dharma.
  • Ishwar Chandra Vidyasagar stood up and stressed that Hindu Philosophy can rise from within, it don't to borrow any western paradigms. He had only one son and he married him with a widow.
  • Swami Dayananda Saraswati not only firmed people's belief in Sanatan Dharma but also wrote critique (Satyarth Prakash) to Abrahamic faiths. Swami Dayananda Saraswati told, their (Abrahamic faiths) own system need reforms. He took philosophical battle to the other camp.
  • Vyas Parampara - tradition of reconstitution the knowledge lost. With that Veda were always preserved and are live document.
  • Sage Yaska (5-6BCE) was the first (as per recorded History) Rishi who defended the Veda and proved Vedic Mantras are not meaningless. One need to read and interpret to understand the Vedic Mantras. He created methodology of interpretation.
  • Adi Sankaracharya countered challenges put up to Sanatan Dharma by Buddhism. His response in the form of Shastra (a rich commentary on Upanishads and Vedas). He given pravachan (discourses) to common people and instilled pride for Sanatan Dharma. Shankara's commentary originated through the discourses he delivered to the villagers. 
  • Guru Gorakhnath (Gou-Raksh-Nath, the one who protected the holy cows) started Nath Jogi Sampraday (Traditions of warrior saints). Guru Gorakhnath and warrior, martial Gorkha (Gou-Raksha) sadhus countered Islamic conversions put forward by Sufis and Swords. Sufis did more conversion than what was done by Islamic sword. He composed his writings in Sanskrit and also local languages so that it can widespread.
  • 10th Sikh Guru Gobind Singh also countered Mogul's oppressions, atrocities and conversions. He formed martial Khalsa Panth. Guru Gobind Singh was a poet, scholar and great saint. He tooks Shastra (शस्त्र ) along with  Shastra (शास्त्र ) for defence. He rewrote Krishnavtar and Ramavatar in Braj Bhasha.
  • Swami Vivevkananda belong to the same great tradition where above saints are part of. Swami Vivevkananda took all the questions from Abrahamic faith and defended Sanatan Dharma. He was not only a voice for Hindus, he was a voice for Asia.

Thursday, June 20, 2013

"American Veda" Author Philip Goldberg invites all to Dharma and Yoga Fest 2013, Los Angeles.

Philip Goldberg is well known spiritual counselor, interfaith minister, workshop leader, author of American Veda, Roadsigns, The Intuitive Edge, and other books. He is member of advisory committee of Dharma Yoga Fest, 2013 Los Angeles. He invites all the Dharma Followers in Southern California to come to the this wonderful fest.
More on the DYF at http://dharmayogafest.org/la

Tuesday, June 4, 2013

Dharma and Yoga Fest celebration planned across USA

The Hindu Swayamsevak Sangh is organizing a Dharma and Yoga Fest at various cities across USA with participation of many Dharmik Organizations.HSS is  inviting all Dharma-centered groups to participate in the event.
Dharma and Yoga Fest event will commemorate Swami Vivekananda’s 150th birth anniversary in 2013 by celebrating his vision of “Universal Peace Through Dharma and Yoga.”
The Dharma and Yoga Fest will include a variety of activities, such as  Hatha Yoga demonstration, a seminar on Dharma and Yoga, Kirtan, Bhajan, Satsang, and crafts and games for children. The event will endeavor to create a sense of harmony, mutual respect, and spiritual oneness.
Renowned author Philip Goldberg who wrote best selling book http://americanveda.com/ has shared his message on this Dharma and Yoga Fest.

Swami ji’s uniquely advanced Dharma in the modern era. The ideas introduced by him to America, such as Yoga, Karma, and the spiritual oneness of humanity, continue to have a growing appeal. This has also led to the popularity of practices such as Haṭha Yoga, Āyurveda, and meditation. The Dhārmika concept of the plurality of spiritual paths invoked by Swami ji in his Chicago Address finds continuing relevance even today in resolving religious conflict.
The Dharma and Yoga Fest forms the finale of our year-long commemoration of Swami ji in 2013. Other events have included a nationwide “Yoga Day” coinciding with Swami ji’s birthday on January 12; a nationwide DharmaBee™ quiz contest for children; programs for high school and college students, such as a traveling exhibit on Swami ji’s life visiting major university campuses and “Vacation with Vivekananda” excursions to locations where Swami ji visited during his travels in the United States; and local social service projects by children and adults alike.

To find out local event at your city go to http://dharmayogafest.org/
Flyer for Los Angeles is attached below.

Tuesday, April 9, 2013

Hindu Calender's legacy to Western calender.

Today Western Calender is quite popular and is de-facto civil calender. Many of us know that western calender is changed many times in history. But only few are aware that the present day calender also is borrowed from Hindu Calender system and still have legacy of it.
Untill 1752 the new year used to begin in March. Which conform with Hindu Calender, Hindu New year usually begin in March/April (based on planetary movements).

Look at below table , four of the Western months are still linked to Hindu Calender system.
Month Number
(Hindu
Calender)
Months – (Hindu Calendar)
Month – (Western Calendar)
Sanskrit translation to Western Months
Meaning
1
Chaitra
March


2
Vaisakha
April


3
Jyestha
May


4
Asadha
June


5
Shravan
July


6
Bhadrapad
August


7
Ashwin
September
7th monthly change in sky.
8
Kartik
October
8th monthly change in sky.
9
Margshirsha
November
9th monthly change in sky.
10
Pausha
December
10th monthly change in sky.
11
Magha
January


12
Phalguna
February




There is an excellent research done on comparison of Hindu calender v/s Roman calender
Read excerpts (p183) from the paper "Indian vis-a-vis Roman calender" , on concept of Year.

In Sanskrit the most popular word for year is Varsa meaning "that which rains, that is , rainy season".Therefore it seems that originally one rainy season to another counted one year.
Thus, a Hindu year is related to the cycle of seasons while the Christian or even Mohammedan year has not such relation.




The paper "The Calendars of India" have detailed study on Calenders originated in India.
Read "British Calendar Act of 1751" when new year changed from March to January form 1752.



Thursday, April 4, 2013

World Hindu Economic Forum (WHEF) Pacific Regional Conference on 4th May, 2013




WHEF Pacific Regional Conference
On Saturday, 4th May, 2013
At The Sheraton Fiji Resort, Denarau, Nadi
Hindu Economic Forum aims to make South Pacific community prosperous
The World Hindu Economic Forum (WHEF) promotes activities that make society prosperous, primarily through the generation and sharing of material wealth.
Following the successful conference of the first WHEF held in Hong Kong on 30 June and 1 July 2012, a number of regional conferences are being organized around the world. The last WHEF Asia conference was held in Kuala Lumpur, Malaysia on 6th and 7th January, 2013.
WHEF Pacific Regional Forum with the theme “Making South Pacific community prosperous” will be held in Sheraton Fiji Resort, Denarau, Nadi, Fiji on Saturday, 04th May 2013. Pacific Region includes Australia, New Zealand, Fiji and other South Pacific Island countries. The Chief Guest of the WHEF Pacific Conference will be Dr Neil Sharma, Minister for Health. Eminent speakers include: Dr Mahendra Reddy of Commerce Commission and FNU, Dr Ganesh Chand Vice Chancellor of FNU, Dr Gautam Sen of London School of Politics and Economics and Dr Biman Prasad of USP.
Hindu business community has been and is contributing significantly in trade, commerce and industry in South Pacific countries, especially in New Zealand, Australia and Fiji.
The Pacific Regional Hindu Economic Forum seeks to bring together financially successful business people such as traders, bankers, technocrats, investors, industrialists, economists, thinkers and professionals to share their business knowledge, experience, and expertise with their fellow business people to generate surplus wealth in service of society and Dharma.
This conference also gives an opportunity to develop a network among business people to further strengthen and organize their role in trade, industry, business and contribute to the economy of the Pacific Region countries.
The conference will also feature Group discussion sessions to discuss industry success stories, challenges and opportunities. The number of registrations will be limited to 150.
The primary objectives of WHEF are to promote activities of developing enterprise and entrepreneurship globally; to develop solutions for most crucial of the issues on world economy like sustainable development, education, eradication of poverty, climate change and infrastructure development; and to promote a value based corporate governance system through organizing seminars, conferences, and research activities.
If you are interested in attending this Forum, and for more information, please email whef.pacific@gmail.com or contact one of the following:
New Zealand            : Mr Vinod Kumar            - 0064 21 795 721
Australia                   : Noel Lal                         - 0061 417 448 293
Fiji & Pacific Is         : Mr Jay Dayal                  - 00679 992 9605
                                                                                                                                                                                                              
Please confirm your registration as seats are limited.
All Information and details are provided by Prof Guna Magesan

Please find below World Hindu Economic Forum  - Pacific Regional Conference brochure.


 2013 Registration
by Sanatan Sarvada

Wednesday, March 6, 2013

The 2013 "Yuva for Sewa" internship projects.An opportunity to serve.

Sanatan Dharma gives lots of emphasis on Selfless Service through Karma Yoga and Sewa.
Here are some Sloka from Bhagvad Geeta.
annād bhavanti bhūtāni
parjanyād anna-sambhavaḥ
yajñād bhavati parjanyo
yajñaḥ karma-samudbhavaḥ
All living bodies subsist on food grains, which are produced from rains. Rains are produced by performance of yajña[sacrifice], and yajña is born of prescribed duties.
The science of transcendental knowledge has been imparted to you, O Arjuna. Now listen to the science of selfless service (Seva), endowed with which you will free yourself from all Karmic bondage, or sin. 
No effort is ever lost in selfless service, and there is no adverse effect. Even a little practice of the discipline of selfless service protects one from the great fear of repeated birth and death. 
A selfless worker has resolute determination for God-realization, but the desires of the one who works to enjoy the fruits of work are endless. 

And this is what Swami Vivekananda said about Sewa or Karma Yoga.
Karma-Yoga is the attaining through unselfish work of that freedom which is the goal of all human nature. Every selfish action, therefore, retards our reaching the goal, and every unselfish action takes us towards the goal; that is why the only definition that can be given of morality is this: That which is selfish is immoral, and that which is unselfish is moral.
"Sewa" is Sanskrit word that means selfless service - a unique concept of Service - Selfless Efforts for Welfare of All.

Youth in USA have an opportunity to work as summer intern with Sewa Internationl USA
Yuva for Sewa is a summer internship offered by Sewa International USA that focuses on service projects in India and Caribbean countries. It is an opportunity for young adults to contribute their time to a larger movement of serving humanity.  
Eligibility : Interns must (1) have graduated high school or be at least 18 years old at the start of the internship (2) be able to participate in the full ten-week internship program (3) be currently residing in US or Canada and (4) possess strong enthusiasm to make a difference. 
Internship Duration : The internship will start Monday June 3rd and end on friday August 9th 2013.
Service Locations : India (Pune, Bhagyanagar (Hyderabad), and Bangalore)

“NAR SEWA NARAYAN SEWA” - “Serving Humanity is Serving God”.



Tuesday, August 21, 2012

Hindu Temples in Southern California

Hindu temples are essential part of Sanatan Dharma. Wherever Hindus migrated, beautiful Hindu temples are built. Uniqueness of Sanatan Dharma temples is that they are not monolithic. There are various Sampraday and numerous temple architectures. This makes each Sanatan Dharma temple unique enough to visit , enjoy beautiful architecture and feel the positive vibrations.
Fortunately, in Southern California there are plenty of beautiful and historic temples. 

Following are major temples with their websites , address and  phone numbers.

Bhagwan Venkateshwara Temple , Malibu 
1600 Las Virgenes Canyon Road,
Calabasas, CA 91302
Phone :( 818) 880-5552 ‎

Kali Mandir , Laguna Beach
20371 Sun Valley Drive
Laguna Beach, CA 92651
Phone: (949) 494-1906

Swaminarayan Mandir, Chino Hills
15100 Fairfield Ranch Road,
Chino Hills, CA 91709
Phone: (909) 614-5000

Gayatri Chetna Center, Anaheim
2446 W. Orange Ave,
Anaheim, CA 92804
Phone: (714) 220-2111
Laxminarayan Mandir, Riverside
9292 Magnolia Ave. Riverside, CA 92503 
Phone: (951) 359-4743

Bharat Sevashram Sangha, Brea
5600 Carbon Canyon Road, Brea, CA 92823 
Phone: (714) 494-4531

Brahma Kumaris,Los Angeles
2428 Griffith Park Boulevard
Los Angeles, CA, 90039
Phone: (323)-664 0022 

Self Realization Fellowship , Los Angeles
Lake Shrine Temple
17190 Sunset Blvd.
Pacific Palisades, California  90272
Phone: (310) 454-4114

Shridi Sai Baba Sansthan, Montebello
144 S 4th St, 
Montebello, CA 90640
Phone : (323) 721-1772

ISKCON, Los Angeles
3764 Watseka Ave.
Los Angeles, CA 90034. 
Phone: (310) 836-2676

Vedanta Society, Southern California
19961, Live Oak, Canyon Road,
Trabuco Canyon, California 92678
Phone : 949-858-0342

Chinmaya Mission Los Angeles
'Chinmaya Rameshwaram'
14451 Franklin Ave, Tustin, California 92780
Phone: (714) 832-7669

More temples…!
Ma Durga Temple , Pasadena  http://madurgatemple.org
Sanatan Dharma Temple , Norwalk http://matiyapatidarcenter.org/temple.shtml
Jain Center , Buena Park http://www.jaincenter.net/newsite/
Irvine Mandir http://mandir.ws/